अनसुने

खाली खातों कि खामोशी के पैवंद कुछ इरादे वो भी रहे, रुसवाई की आदत से दरगुजर कुछ वादे वो भी रहे, कि आदतों की आहट में गुमसुम से रहे, कहने की आदत को चुनते ही रहे।

खाली खातों कि खामोशी के पैवंद इरादे कोई और भी रहे, कशिश सी में गुजरते वादे कुछ और भी रहे,
इख्लाक ए यकीन की आहट में डूबे रहे, शिकस्त ए तमाम कुछ याद ना रहे।

खाली खातों कि खामोशी के पैवंद इरादे कोई वो भी रहे, कशिश सी में गुजरते वादे कुछ और भी रहे, क्या जाने किन चाहतों में घुलते वो भी रहे।

खाली खातों कि खामोशी के पैवंद इरादे कोई और भी रहे,
आर्जी सी एक शिरकत की शिनाख्त में दरबदर हुए, दिल के कुछ इरादे वो भी रहे।

खाली खातों कि खामोशी के पैवंद इरादे कोई और भी रहे,
इरादतन ही सही, कश्मकश में घुलते वादे कुछ और भी रहे।

खाली खातों कि खामोशी के पैवंद इरादे कोई और भी रहे, कागजी किसी वफा को ढूंढते इरादे कोई और भी रहे।

खाली खातों कि खामोशी के पैवंद इरादे कोई और भी रहे,
आदतों से मजबूर से इरादे कोई और भी रहे।

खाली खातों कि खामोशी के पैवंद इरादे कोई और भी रहे,
रुसवाई की आदत से दरगुजर वादे और भी रहे, शायद आदतों की आहट में गुमसुम से रहे, कहने की आदत को ही थे वो ढूंढ रहे।

खाली खातों कि खामोशी के पैवंद इरादे कोई वो भी खूब रहे, रुसवाई में दरबदर फिरते वादे वो और ही रहे!!!

Out with a new post……………. just a little on the aspects to what’s afterall unsaid. on’t forget           

Don’t forget to check it out, like, share, follow and comment me your views, I’d be happy to hear them out🤗✌️! Join me on the other side to the known, where I share life as I see it through the darkness!!!✌️✌️✌️           

3 Replies to “अनसुने”

  1. जब खामोशी यकायक कुछ कहना चाहती है तो
    शब्द कुछ तरह भावनाओं को बयाँ करते है जैसे आपने किया।

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