जिंदगी…..

जिंदगी तो जिंदगी है, जिंदगी बस जिंदादिली है, क्योंकि जिंदगी ज़िंदादिलों से ही तो बनी है। कभी हर हफ्ते के आखिर में पापा से मिलने वाली उस पॉकेट मनी सी सुनहरी, तो कभी महीने के अंत में झांकते खर्चों की फेहरियत सी बड़ी है, क्योंकि जिंदगी तो जिंदगी है

कभी आलू के पकौड़ों की प्लेट सी भरी है, तो कभी चिप्स के पैकेट से निकलने वाली हवा सी लगती है, क्योंकि जिंदगी तो जिंदगी है
कभी माउंट ऐवरेस्ट के शिखर सी ऊंची तो कभी रजाई में ठंड से सिकुड़ी है, क्योंकि जिंदगी बस जिंदगी है

कभी टॉफी चॉकलेट की खट्टी मीठी यादों से बनी,तो कभी 7-कोर्स मील सी नखरिली है, क्योंकि जिंदगी तो जिंदगी है

कहीं भूखे पेट की नींदों से उजड़ी है, तो कहीं भर पेट भी बेचैनी से बंधी है कहीं रूखे सूखे में भी सीना तान के खड़ी है, तो कहीं आशियानों के बोझ तले दबी है, क्योंकि जिंदगी तो जिंदगी है।

कहीं हार में भी हिम्मत से बंधी है, तो कहीं जीत कर भी झुकी झुकी है, क्योंकि जिंदगी तो जिंदगी है

कहीं चाट की चटपटी कटोरी , तो कहीं कड़वे नीम की डली है, पर जिंदगी ये फिर भी मिसरी सी मीठी है। कहीं टूटने पर भी हिम्मत बांधती है, तो कभी हार जाने पर गुनहगार जताती है, जिंदगी फिर भी जिंदगी है

कभी कॉफी के भरे कप सा याराना दिखाती है, तो कहीं मेरे फ्रेंड्स की शॉपिंग लिस्ट सी छोटी है, पर जिंदगी तो आखिर जिंदगी है कभी गुजरे पल को यादों सी मीठी, कभी आसुओं की नमी सी नमकीन है, क्योंकि ये तो मेरी जिंदगी है और यही तेरी जिंदगी है, और जिंदगी आज भी जिंदादिली से है।

Out with a new post, just some life aspects in my native language, as I saw them peeping through the beautifully nostalgic past , and waiting with a future too bright to resist. Don’t forget to check it out, like, share, follow and comment me your views, I’d be happy to hear them out🤗✌️!

And join me on the other side to the known, where I share life as I see it through the darkness!!!✌️✌️✌️

Published by Dr Yashica Sharma

I just believe in the idea of being the version I can respect and look upon to. A bibliophile turned medico!!

11 thoughts on “जिंदगी…..

  1. 💜 Rugby Players, like Me, CHOOSE!!! Pain EveryOne as do many other Various Athletes; what We Say to Each Other and Others is ‘Enjoy The Pain’ because We ALWAYS HEAL!!!…having said that Non-CONSENSUAL!!! “Darkness” is WRONG!!! and Must Be Arrested in Its Tracks; ergo, on The Other Hand Consenting to Experiencing “Darkness” is Another Matter Entirely that may lead to Regret and Remorse (a Lesson) or a Satisfactory Experience (a Warm, Mellow Memory)

    …💛💚💙…

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