कह दूंगी

कभी हकीकत कभी ख्वाब, कभी याद कभी हालत मेरी ख्वाहिश में अक्सर डूब कर रह जाता है हर वजूद का जवाब।
कह दूंगी मैं भी हकीकत कभी, या चुप रह जाऊंगी,
या शायद बस यादों के झरोखे से छुप कर ही देख आऊंगी, देख आऊंगी उस वक्त की कहानी, जब वक्त के हवालों से हुई थी नादानी।

कह दूंगी कभी मैं भी हकीकत, कभी चुप रह जाऊंगी या की शायद उन सुनहरे पलों को जीने फिर बीते कल में लौट जाऊंगी,
और चुपके से अपनी मासूमियत में कोई हकीकत ढूंढ आऊंगी।

कह दूंगी कभी मैं भी हकीकत, कभी चुप रह जाऊंगी, और चुपचाप सी अपने आपको ढूंढ लाऊंगी

हो शायद ऐसा भी, मासूमियत के नजर, अब भी धक रखी हो बातें गहरी कोई, जिनकी आस में कोई खाली डिबिया भर आऊंगी अपने इरादों की महक से,

कह दूंगी मैं भी कभी, कभी चुप रह कर भी सब बोल जाऊंगी।

Hi everyone, this post is all about a woman’s thoughts left unsaid!! Please read and if you like it, share, follow and comment me your views, I’d be happy to hear them out🤗✌️!

Published by sharma_yashu

I just believe in the idea of being the version I can respect and look upon to. A bibliophile turned medico!!

6 thoughts on “कह दूंगी

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